Friday, 12 August 2011

अपने ज़माने के प्रसिद्द उत्तराखंडी गायकों के अनमोल गीत सुनिए सिर्फ

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Wednesday, 20 July 2011

यंग उत्तराखंड की 14 वीं दिल्ली आम सभा 2011




यंग उत्तराखंड की 14 वीं दिल्ली आम सभा 2011

यंग उत्तराखंड की 14 वीं दिल्ली आम सभा 2011 ( Delhi Meet) दिल्ली के गढ़वाल भवन, पंचकुईया रोड नई दिल्ली में दिनाक 17 जुलाई 2011 को संपन्न हुई |


बैठक के कार्यवृत्त (Minutes of the Meetings)

पिछली बैठक के कार्यवृत्त की पुष्टि :

श्री चंद्रकांत नेगी जी ने यंग उत्तराखंड की कार्यकारणी सदस्यों की पिछली मीटिंग जो की दिल्ली के रोहिणी सैक्टर 17 में दिनांक 10 जुलाई 2011 को संपन्न हुई के कार्यवृत्त की पुष्टि की | जिसमे सदस्यों ने 17 जुलाई 2011 को दिल्ली के गढ़वाल भवन, पंचकुईया रोड नई दिल्ली में होने वाली दिल्ली आम सभा के आयोजन की रुपरेखा व् अजेंडा का प्रारूप तैयार किया गया था |

प्रारंभिक वक्‍तव्‍य एवं स्‍वागत कथन :

सभा का आरम्भ प्रात: 11:30 बजे हुआ | प्रारंभिक वक्‍तव्‍य एवं स्‍वागत कथन के रूप में सर्वप्रथम श्री चंद्रकांत नेगी जी ने अपने अभिभाषण के माध्यम से उपस्थित सदस्यों एवं विशिष्ठ मेहमानों का स्वागत किया | उन्होंने अपने अभिभाषण में यंग उत्तराखंड का परिचय दिया तथा उपस्थित सदस्यों एवं मेहमानों का इस सभा में शामिल होने के लिए न्यवाद दिया और कहा की उत्तराखंड का विकास इन्टरनेट पर रह कर या केवल मेल द्वारा नहीं हो सकत इसके लिए संगठित होना बहुत जरूरी है | साथ ही साथ उन्होंने यंग उत्तराखंड द्वारा उत्तराखंड के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रो में संपन्न किये गए सामाजिक व् शैक्षिक कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी प्रदान की |

यंग उत्तराखंड सिने अवार्ड्स के आयोजन का उद्देश्य बताते हुए न्होंने कहा की यह कार्यकर्म आयोजित करने के पीछे उत्तराखंड सिनेमा को गुमनामी से बचाने एवं अच्छे गीत संगीत, फिल्म एवं कलाकारों को प्रोत्साहित करना है, उत्तराखंड सिनेमा रहेगा तो पहाड़ से दूर बसे लोगों को पहाड़ों की संस्कृति , भाषा एवं लोगों से सदा जोड़े रहेगी और इसके लिए जरूरी है की पहाड़ का सिनेमा फूले फले. उन्होंने उपस्थित सदस्यों को अपना अपना संक्षिप्त परिचय देने के लिए आमंत्रित किया |तत्पश्चात उपस्थित व्यक्तियों ने अपना अपना परिचय दिया | इसके पश्चात यंग उत्तराखंड के सदस्यों ने अपना अपना परिचय दिया | बैठक में ४० लोग उपस्थित थे |

इसके पश्चात नेगी जी ने यंग उत्तराखंड द्वारा आयोजित अभी तक किये गए प्रोजेक्ट्स की विस्तृत जानकारी देने के लिए सुश्री हीरा जी को आमंत्रित किया |

सुश्री हीरा जी का
वक्‍तव्‍य व अभिभाषण :

इसके बाद सुश्री हीरा रावत जी ने
यंग उत्तराखंड द्वारा किये जाने वाले निम्न कार्यक्रमों के बारे में उपस्तिथ अतिथियों व सदस्यों का स्वागत किया एवं सभी को कुमाऊँ एवं गढ़वाल में आयोजित निम्न शिविर के बारे में सविस्तार बताया |

निबंध प्रतियोगिता निशुल्क: चिकित्सा शिविर विद्यालयों में छात्र – छात्राओ के लिये रोजगारोन्मुख मार्गदर्श शिविर रक्त दान शिविर निर्धन होनहार छात्रो को उनकी शिक्षा में सहयोग हेतु चाइल्ड अडोप्शन कार्यक्रम सुश्री हीरा रावत जी यंग उत्तराखंड द्वारा अभी तक आयोजित किये गए सभी सामाजिक व् शैक्षिक कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी प्रदान की | सुश्री हीरा रावत जी ने यंग उत्तराखंड द्वारा यंग उत्तराखंड द्वारा वर्ष २०११ के प्रस्तावित रोजगारोन्मुख मार्गदर्शन शिविर एवं निशुल्क चिकित्सा शिवर के बारे में बताया को की अक्तूबर व नवम्बर २०११ मे उत्तराखंड के गढ़वाल व कुमाऊ क्षेत्रो में क्रमवार तिथियोनुसार आयोजित किये जायेंगे |

श्री नीरज रावत जी का वक्‍तव्‍य व अभिभाषण :

तदुपरांत यंग उत्तराखंड के श्री नीरज रावत ने यंग उत्तरखंड द्वारा परिकल्पित यंग उत्तराखंड सिने अवार्ड्स कार्यक्रम के बारे में उपस्थित अथितियो को इसकी भूमिका व महत्व के बारे में सविस्तार बताया | उन्होंने ने बताया की यंग उत्तराखंड ने यंग उत्तराखंड सिने अवार्ड्स कार्यक्रम की शुरुवात वर्ष २०१० में उत्तराखंड सिनेमा उद्योग को प्रोत्साहित करने की विचारधारा के मद्देनजर की गयी | श्री नीरज रावत ने कहा कि फिल्मे एक ऐसा माध्यम है जिससे भावी पीड़ी उत्तराखंड की संस्कृति एवं भाषा से जुड़े रहे. उन्होंने सदस्यों के मध्य उत्तराखंड सिनेमा उद्योग की दशा व दिशा तथ्यों पर अपने विचार उजागर किये व सदस्यों से चर्चा की एवं भविष्य में इनसे आयोजनों के लिए उत्तराखंड की जनता से सहयोग की अपील भी की |


यंग उत्तराखंड की इस आम सभा में यंग उत्तराखंड के निम्न सदस्य उपस्थित थे :
सर्वश्री विपिन पंवार (अध्यक्ष)
श्री विवेक पटवाल (महा सचिव)
श्री आशीष पांथरी (सह सचिव)
श्री चंद्रकांत नेगी (कोषाध्यक्ष)
श्री विजय सिंह बुटोला (सह कोषाध्यक्ष)
श्री मनोज रावत (कार्यकारी सदस्य)
श्री नीरज रावत (रचनात्मक कार्याधिकारी)
श्री सुभाष कांडपाल (जन संपर्क अधिकारी )
श्री सचिन शर्मा (कार्यकारी सदस्य)
सुश्री हीरा रावत (सदस्य)
सुश्री शोभा नेगी (सदस्य)
श्री भारत भूषण लेखवार (सदस्य)
श्री सुरेन्द्र सिंह रावत (सदस्य)
श्री अभिनव सुयाल (सदस्य)
श्री सुधीर पुंडीर (सदस्य)

बैठक में जाने माने स्वंसेवक श्री गोपाल रतूड़ी जी अपनी धर्मपत्नी जी के साथ थे | उत्तराखंड नोर्थ अमेरिका एशोशिएशन के अध्यक्ष श्री विजय शर्मा ,श्री संदीप शर्मा (एडवोकेट) एवं आरोही फिल्म सोसाइटी संश्ता के श्री गौरव पाण्डेय जी भी इस बैठक में उपस्तिथ हुए. सभी विशिष्ठ मेहमानों ने यंग उत्तराखंड के द्वारा आयोजित सभी कार्यकर्मो के बारे में सराहना की व समस्त सदस्यों को अपने कार्यो के संपादन हेतु अपने विचार व्यक्त किये तथा भविष्य में उनकी ओर से सदा उनके साथ होने के बात कही |

इसके पश्चात चंद्रकांत नेगी जी ने सभी उपस्तिथ लोगों से यंग उत्तराखंड के कार्यकलापों को और बेहतर बनाने के लिए एवं उत्तराखंड के विकास सम्बंधित सुझाव मांगे | उत्तराखंड नोर्थ अमेरिका एशोशिएशन के अध्यक्ष श्री विजय शर्मा जी ने सुझाव दिया की अगर सभी संस्थाए एक बैनर के तले आकर काम करे तो उत्तराखंड का विकास संभव है और वो हर तरह से यंग उत्तराखंड की उदेश्यों के लिए पूरा पूरा सहयोग करेंगे | श्री गोपाल रतूड़ी जी ने कहा की वे भी किसी सामाजिक संस्था के साथ जुड़े हैं और उत्तराखंड में सामाजिक सेवाओं में लिप्त है उन्होंने यंग उत्तराखंड के साथ शिवर में अपना योगदान देंगे को कहा | श्री गौरव पाण्डेय जी ने कहा की यंग उत्तराखंड के प्रयासों की सराहना के एवं कहा की वे भारत के कई फिल्म इंडस्ट्री में एवं मीडिया कॉलेज में फिल्म इंडस्ट्री के कार्यों के लिए वर्कशाप का आयोजन करते रहते हैं और जरूरत मंद फिल्म निर्माता / निर्देशकों तकनीकी यंत्रों को डिस्काउंट रेट पर और आवश्यकतानुसार फ्री उपलब्ध करते हैं और उत्तराखंड सिने इंडस्ट्री के विकास के लिए किसी भी गोष्ठी / कार्यशाला के लिए वो हमेशा उपलब्ध रहेंगे.

इसके पश्चात दोपहर २:३० पर श्री चंद्रकांत नेगी जी ने उपस्थित सभी अतिथियों व सदस्यों का हार्दिक आभार प्रकट किया और सभा समाप्ति की घोषणा की | तदुपरांत अतिथियों व सदस्यों ने जल पान ग्रहण किया और इस प्रकार यंग उत्तराखंड की १४ वीं आम सभा सफलता पूर्वक संपन्न हुई |

निवेदक : विजय सिंह बुटोला

Thursday, 7 July 2011

Garhwali Folk Songs about Ancestor Worship at the Time of Wedding

(Garhwali Wedding Folk Songs, Himalayan Wedding folk Songs, Indian Marriage Folk Songs)

Bhishma Kukreti

In Hindu religion, paying homage to their ancestors is very important Sanskar out of 44 sanskar. The season of fortnight, for paying homage is called Shradh time.

Apart , Shradh, Hindus pay homage to their ancestors at many auspicious ceremony as in wedding ceremony after Haldihath, the Pundit jee pays homage to ancestors of the family . The spirits of ancestors are invited to bless the bride or groom.

Paying homage or remembering ancestors and paying tribute is common in many communities of other countries and religions too.

Tribute to Ancestors in Japan

An ancestral ceremony ‘Bon’ takes place either in july or August every year. During Bon ceremony family members return to their parental homes for paying honour to their ancestors. The family members visit the temple to meet the souls of their ancestors.

The Bon ceremony also take place after one year, three years, seventh years, thirteenth, seventeenth, twenty third, twenty seven, thirty third, fiftieth and hundredth years of the dead ones.

At the time of wedding Japanese remember their ancestors.

Worship of Ancestors by Mulam Ethnic Groups in China

In china, Mulam ethnic groups pay homage to their ancestors by performing ceremony in February . At Grave Sweeping Festivals, the Mulamian people sweep the grave of ancestors and collect money for the gravestoo. There are folk songs related to sweeping grave ceremony

Ancestral Tribute Worship in Inca

In South America, in pre Colombian era, ‘Aya marcay Quilla’ or Month of dead is celebrated.(November) . The dead were taken out from crypts, the dead one are dressed and offered food. Then there were dances and rituals to pay homage the ancestors (Reference: D'Altroy, Terence N. The Incas. Malden, Mass.: Blackwell, 2002.)

Ancestoral Worship in Guzhou China

In Guzhou community, ancestral worship is very important Ssanskar or custom to celebrate. Shi community call this ceremony “Yulunduan”

Vietnamese way of Ancestral Worship

Nearly in every house, office or business, there is an alter which is for to use to commune with ancestors

In Vietnam, apart from death day , the Vietnamese people remember their ancestors on birth, on birth day, starting a new business, buying costly products as house, marriage or whenever a person needs help, favor .

Ancestral worship in Lesotho (African country)

Though, the majority of people of Lesotho are Christians, but their rites in Church are mixed with ancestor worshiping chants

Ancestral worship in Sisa (Africa)

There is a dance and music in Africa called “ Ring Shout”. This is prayer to god for calling their ancestor

Ancestral Worship in Jewish religion

Joseph Jacobs provides details of ancestor worshipping in Jewish religion by providing the references of Old Testimonials and references fromC.Grüneisen,Der Ahnenkultus und die Urreligion Israels, Halle,1900, which contains a full bibliography (pp.ix.-xv.)

Ancestral Worship in Korea

In Korea the name of ancestral worship is Jerye” or “Jesa”. The ceremony of the death anniversary is called “ Charye”

Ancestor Worship or Tribute to dead ones in Europe

In most catholic families of Europe , “All Saints Day” is ancestral worshipping day

Ancestral Worship in Ireland

Irish believe that during Samahian , dead were supposed to return and in old tradition, Irish people left food and light were left for them.

Garhwali Tradition to pay Homage to Ancestors and Folk Songs for Nandi Mukh Shradh

At the time of wedding in Garhwali community, ancestors are remembered many times . There is one ritual after haldihath, bathing , Arti , the Pundit jee read chants regarding Nandi Mukh Shradh (A Rritual to remember ancestors)as done in Shradh ) . T Here, pundit jee reads rituals in Sanskrit women sing the particular folk

विवाह के अवसर पर गया जाने वाला नंदी मुख श्राद्ध का मांगळ (गढ़वाली लोक गीत )

The song is about inviting their ancestors to attend wedding ceremony .
Initially the ancestors are invited in initial wedding ceremony to bless the groom/bride
In the song the society assume that the ancestors in heaven above the sky. the song presumes that the path from heaven to the earth is having rogh roads, hills, spiky bush. and the singers ask the live members to clean the roads by various appliances as spades, reaping hooks etc
there is mention and assurance to ancestors souls that we shall offer libation of water and milk to the ancestors .
At last the ancestors of nine generations are requested to bless
ऐ जावा पितरा ऐ जावा पितरा मैं मात लोक
ऐ जावा पितरा ऐ जावा पितरा मैं मात लोक ए s s s

तुम तैं पितरा तुम तैं पितरा न्यूत बुलोंला
तुम तैं पितरा तुम तैं पितरा न्यूत बुलोंला ए s s s
कनकैक ऑन्ला कनकैक ऑन्ला मै मात लोक
कनकैक ऑन्ला कनकैक ऑन्ला मै मात लोक ए s s s

मै मात लोक मै मात लोक किंकर्युं का झ्याळ
मै मात लोक मै मात लोक किंकर्युं का झ्याळ ए s s s

किंकर्युं का झ्याळ किंकर्युं का झ्याळ पोड पखाण
किंकर्युं का झ्याळ किंकर्युं का झ्याळ पोड पखाण ए s s s

कोरी तुमड़ी ल़ा कोरी तुमड़ी ल़ा कुयादी फटोला
कोरी तुमड़ी ल़ा कोरी तुमड़ी ल़ा कुयादी फटोला

पयाँ बींड़ दाथिन पयाँ बींड़ दाथिन जील कटला
पयाँ बींड़ दाथिन पयाँ बींड़ दाथिन जील कटला
घौणु सबळयूँन घौणु सबळयूँन पाड़ फोडला
घौणु सबळयूँन घौणु सबळयूँन पाड़ फोडला ए s s s

अपणा पितरों कु अपणा पितरों कु बाटो बणोऔल़ा
अपणा पितरों कु बाटो बणोऔल़ा ए s s s

चांदी सांगउ चांदी सांगउ तुमकू लगौन्ला
चांदी सांगउ तुमकू लगौन्ला ए s s s
तुम बिन पितरो तुम बिन पितरो कारज नि होंद
तुम बिन पितरो कारज नि होंद ए
ताम्बा परात मा ताम्बा परात मा तर्पण द्युन्ला
ताम्बा परात मा तर्पण द्युन्ला ए s s s
गाई दूधन गाई दूधन तर्पण द्योला
गाई दूधन तर्पण द्योला ए s s s

ऐ जावा ऐ जावा पितरो मैं मात लोक
ऐ जावा पितरो मैं मात लोक ए s s s

कै जलमो हवालो कै जलमो हवालो पूत सपूत
कै जलमो हवालो पूत सपूत ए s s s

जौन हमकू जौन हमकू न्यूतो भिजाई
जौन हमकू न्यूतो भिजाई ए

जो ह्वाला तुमारा जो ह्वाला तुमारा पिंड पळयावूँ
जो ह्वाला तुमारा पिंड पळयावूँ ए s s s

पिंड पळयांवुं पिंड पळयांवुं अंचळी ढ्क्याओ
पिंड पळयांवुं अंचळी ढ्क्याओ ए s s s

सागसी ह्व़े जाओ सागसी ह्व़े जाओ नौ पीढयूँ का
सागसी ह्व़े जाओ नौ पीढयूँ का ए

नौ पीढयूँ का नौ पीढयूँ का सात साक्युं का
नौ पीढयूँ का सात साक्युं का ए s s

पितर लोक पितर लोक चमकै उठाला
पितर लोक चमकै उठाला ए s s s

मुळकै हैंसाला मुळकै हैंसाला जुप कै बैठाला
मुळकै हैंसाला जुप कै बैठाला ए s s s

हमारो कारज हमारो कारज सुफल करियां
हमारो कारज सुफल करियां ए s s s

दे द्याओ पितरो दे द्याओ पितरो अपणो दुरबा
दे द्याओ पितरो अपणो दुरबा ए

सदा रैं अमर सदा रैं अमर पितर लोक
सदा रैं अमर पितर लोक ए s s s

दे जावा पितरो दे जावा पितरो आशिरबाद
दे जावा पितरो आशिरबाद ए s s s
Reference : Totaram Dhoundiyal Shrimati Shailja Thapliyal, Mangal, Dhad Prakashan , Dehradun
Copyright @ Bhishma Kukreti bckukreti@gmail.com

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Tuesday, 7 June 2011

आजाद भारत में आजकल जो हो रहा

आजाद भारत में आजकल जो हो रहा है उसके बारे में मैं सोच रहा था ? बापू को याद किया ..!!..रात को बापू मेरे स्वपन में आये और बोले बेटा तुमने मुझे याद किया, मैंने बोला जी बापू , बापू जी बोले, बोलो क्या परेशानी है | मैं बोला बापू आजाद भारत में ये सब क्या हो रहा है बापू बोले बेटा देख रहा हूँ सब ? मैंने बोला बापू इसका कोई उपाय है ? आपने तो देश को आजाद कराया था , बापू बोले बेटा मैंने अकेले कहाँ देश को आजाद कराया था | मैंने बापू से पुछा बापू अब क्या किया जाय ? बापू बोले बेटा यदि भारत को भ्रष्टाचार से मुक्त करना है तो

Vipin Panwar "Nishan"
07/06/2011, New Delhi